tere jkham ki nishani...
पिंजरे में बुलबुल की जिंदगानी भी देखी
कांटों में एक गुल की जवानी भी देखी
हर पल दर्द का एक नया मोड़ लेती
मुहब्बत की कमसिन कहानी भी देखी
सौतन की दुश्मनी को भी मात देती
दुनिया की बेरहम कारस्तानी भी देखी
मेरे इश्क को ठुकराने से ठीक पहले
तेरे लब की दिलकश परेशानी भी देखी
कितनी चोटें तूने छोड़ी मेरे दिल पे
तेरे जख्मों की हर एक निशानी भी देखी
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