हैं प्रीत जहाँ की रीत सदा... नाकोड़ा भैरव भजन
तर्ज:- है प्रीत जहाँ की रीत सदा.....
है प्रीत जहाँ की रीत सदा,
मैं गीत भेरू के गाता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ
मैं गीत भेरू के गाता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ
छोटे मोटे का भेद नही,
हर भक्त से भेरू नाता है
कुछ और न आता हो हम को
हमें भक्ति करना आता है
हर भक्त से भेरू नाता है
कुछ और न आता हो हम को
हमें भक्ति करना आता है
जिसे मान चूकी सारी दुनियाँ,
मैं बात वही दोहराता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ
मैं बात वही दोहराता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ
इतने भक्तिमय हैं लोग यहा,
मैं नित नित शीश झुकाता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ।
मैं नित नित शीश झुकाता हूँ
भेरू की भक्ति करता हूँ,
भेरू के भजन सुनाता हूँ।
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nakoda bhairav bhajan
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