कोशिश तो कर....
तू मेरे पास आने की कोशिश तो कर,
दूरियाँ कुछ मिटाने की कोशिश तो कर.
मैं तेरी ही ग़ज़ल का कोई शेर हूँ,
तू मुझे गुनगुनाने की कोशिश तो कर.
चाहे उजड़ा सही मैं मगर घर तो हूँ,
तू मुझे फिर बसाने की कोशिश तो कर.
उम्र भी अब उदासी से कहने लगी,
अब तू हंसने -हंसाने की कोशिश तो कर.
डूब जाए ये रिश्ते की कश्ती कहीं,
इससे पहले बचाने की कोशिश तो कर.
खोल दरवाज़े घर के मेरे हमसफ़र ,
घर पे खुशियाँ बुलाने की कोशिश तो कर.
मैं तो सदियों से कहता रहा हूँ यही,
मुझको अपना बनाने की कोशिश तो कर.
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